Saturday, November 10, 2012

जीवन एक पहलू


अभी इस संस्था में काम करते हुये करीब दो वर्ष होने को है और इन वर्षो में काम करते हुये एक रेस्पोंसिबिलिटी ऐसी भी है जहाँ कुछ ऐसे लोगों के जीवन का हिस्सा बनना परता है जो कि शायद बहुत ही दुःख और दर्द का समय होता है और वह है "डेथ क्लेम" । और यह वह पल होता है जब जीवन के सबसे करीबी अपनो से हमेसा के लिये जुदा हो जाते है और केवल अपनी याद उनके साथ छोर जाते है ।

लोग आते है हम उनके दुःख का हिस्सा ना होते हुये नियम के अनुसार उन्हें कंपनी से मिलने वाले डेथ क्लेम के बारे में सभी कुछ बताते है और भरसक इतना प्रयास  करते है की उन्हें अपने उस इन्सान के जाने के बाद का धन जो की उनके फ्यूचर के लिये छोड़ा  गया था जल्दी मिल जाये ।सारे डाक्यूमेंट्स हमारे संस्था में जमा होने के बाद से उन्हें क्लेम की रासी मिलने तक हम उनके साथ भी उनके दुःख के साथ जुरे रहते है ।

ना जाने कितने क्लेम प्रोसेस करने के बाद भिलाई के एक इन्सान जो की अपने जवान बेटे की मौत के बाद मेरे संपर्क में आये और करीब दो से तीन महीने तक मुझसे जुड़े रहे । उस पिता की उम्र करीब 55 वर्ष होंगी और उस बेटे की उम्र जिसकी मौत हुई थी 15-16 वर्ष । शायद वह करीब हमारे ऑफिस में 10 बार आ चुके होंगे । आँख में चस्मा और हाथ कांपते हुये उसकी हिम्मत को, मैं गौर कर रहा था उनके चहरे पर एक भी सिकन नहीं था  हालाँकि उसके बेटे की मौत एक दुर्घटना थी तो उन्हें पुलिश  थाने भी जाने की जरुरत परी जिसमे उसकी हिम्मत भी जबाब दे चुकी थी। उनकी सहायत के लिये मुझे भी अंतिम बार अपने रिपोर्ट भेजने के लिये भिलाई के उसी पुलिश थाने में जाना पड़ा जहा उनके बेटे का पोस्टमार्टम हुआ था ।

उसने मुझे बताया की थाने वाले उसे सही से मदद नहीं कर रहे है । मैं वहा गया और जितनी जानकारी मुझे लेनी थी पुलिश थाने वाले ने सही से जानकारी दी । और मुझे वहां जा कर पता चला कि  किस तरह आम लोग और गरीब लोग इन सरकारी नौकरपेशो से परेशांन रहते है । मेरा काम हो चूका था और मेरे रिपोर्ट भेजने के बाद कुछ दिनों के बाद डेथ क्लेम का चेक आ गया और मैंने उस पिता को ऑफिस बुला कर वह चेक जैसे ही उसके हाथ में दिया पहली बार उस पिता को मैंने अपने सामने रोते हुए देखा । उसके आँख में आंसू देख कर उसके दुःख को तो मै महसूस कर रहा था पर मेरी कोई भी शब्द उसके दुःख को कम नहीं कर सकते थे । पर मेरे जुबान से एक ही शब्द निकले जो की हमेशा निकलते है "इन्सान के जीवन में यही एक पल होता है जिसमे उसका या उसके अपनों का कोई वश नहीं होता है और यह जीवन की सबसे करवी और सच्ची सच्चाई है ।"

उस पिता ने रोते हुए अपने बेटे की याद में उन पैसो से एक मंदिर बनाने की बात कही और मुझे धन्यवाद कह कर चला गया ।

शायद ही मैं दुबारा उस इन्सान से मिल पाऊंगा । लेकिन जीवन की सबसे बरी सच्चाई से उसने मुझे एक बार फिर से  आमने सामने खरा कर दिया ।

राजेश !!!!!!




Monday, September 3, 2012

वो रौशनी जो आज परछाई है ......

कल मैंने एक ऐसे इन्सान से पहली बार इतने देर बात की जिन्हें मै दस सालो से जनता हूँ और एक ही बार मिला हूँ आपने उस इन्सान के साथ जो मेरी अपनी परछाई है पता नहीं कभी लगता है उसके बारे में लिखू या ना लिखू पर ना जाने कितने सवाल उस इन्सान के लिएये और उस जीवन के लिये रन्हे है जो जीवन के इतने नजदीक रहने पर भी उस जीवन के उलट फेर से हार गए हैमै कोसिस कर के भी उन्हें कोई तस्सली नहीं दे पाया क्युकी मै उनके सामने जीवन के मायने को कुछ भी नहीं जनता हूँवही जिंदगी में बार बार आने वाले सब्द से वे चुक गए और आपने आप को जीवन में कशुर वार समझने लगे


मुझे लगा नहीं था उस जीवन में कोई इतने अन्दर जाने के बाद उस बाहरी जीवन से भी धोखा खा जायेंगे ..पर इस जीवन ने उन्हें आपने तरफ भी खीचा ..और कल उन्होंने उस इन्सान के बारे में जिक्र किया जिसके बारे मैंने सोचा भी नहीं था की मै तो भूल भी चूका था ..पर वही इन्सान ने मुझे इस इन्सान से मिलाया था और चली गई थी...और मुझे यह आसा भी नहीं थी की उस इन्सान ने भी कंही कंही उन्हें चोट पहुचाया था ..और उसी रिजल्ट के चलते कंही कंही इस बार वे धोका खा गए ... सायद यह जिंदगी में उन अनजानी बिस्वास और धोखा की जंग थी जिसमे दो इन्सान हार गए ...अभी तक वो सरे सब्द मेरे कानो में गूंज रन्हे है जिनका जबाब मै खोज नहीं पा रंहा हूँ ...पता नहीं मै केसे उसे आपने सब्दो में उतारू कंही मै गलत साबित ना हो जाऊ ... इन्सान जब एक दुसरे से जुरते है तो कब तक एक वे आपने इस रिश्ते को किसी चाहत के बिना गुजर सकते है ...सायद वे भी अयसा नहीं कर पाए और उन्हें इस की कीमत ना जाने कितने सवालो से जीवन भर बिताना परेगा ....



Thursday, December 30, 2010

आसान है .....


अभी कुछ दिन पहले मैंने कुछ पढ़ा और इसे लोगो के बताने के लिये मै आपने आप को रोक नहीं सका । एक इन्सान जिसने खुद आपने आप से सवाल किया पर आपने आप तक उस आपने सोच और जीवन के सच्चे विचार आपने आप तक नहीं रख पाए और मजबूरन उन्हें आपने विचार को दुनिया तक लाना परा जिसपर कुछ लोग अमल कर रन्हे है और कुछ लोग उसे गलत मानते है । परउनके अयसे विचार जो आपने जीवन पर लागु किएये पर मै ये नहीं समझ पाया की वे आपने विचार को आपने आप तक ही क्यों नहीं रख पाए । उनके अयसा करने पर मेरे जेहन में कुछ सवाल उभरे जेसे :-
क) वे आपने सोच आपने आत्मा से उब गिये थे जिसके कारन उन्हें लोगो से आपनी सोच को जानने के लिये उन्हें आपनी सोच और बिचारो को दुनिया के सामने लाना परा ?
ख) या उन्हें आपने सोच और विचारो पर तालिय की जरुरत हुई ?

पता नहीं क्यों सायद हम भी यही चाहते है .... जब मै कभी किसी के साथ बैठता हूँ मुझे आपनी कोई भी बात बोलने की जरुरत नहीं होती है बस उन लोगो के सब्दो को सुन कर की लगता है की सायद जरुरत ही नहीं की आपने बातो को लोगो से बोलने की । सायद हरेक इन्सान के मन में वही सोच होती है जो हमारे मन में होती है ... क्यों हम आपने सोच को लोगो से अलग सुनने के लिये कुछ अयसा लिखने की कोसिस करते है जिससे हम लोगो के दिल में आपनी के अलग पहचान बना ले । सायद ये हमारी कमजोरी होती है ... जन्हा पर हमें आपने सोच और विचारो को लोगो के पास लाने की जरुरत होती है । तब तो वे लोग ही हम से जयादा खुश है जिन्हें आपने विचारो और सोच को लोगो तक लेन की जरुरत नहीं होती है ।

जीवन में सबसे आसन है किसी से आपने अच्छाई को सुनना और आपने आप को एक अलग साबित करना सायद यह एक भी कर सकता है ... पर क्यों हम अयसा करते है ...दुनिया में हम अयसे लोगो का चुनाव क्यों नहीं कर पाते है जिन्हें हमारी सोच की नहीं कुछ आपने तरफ से करने की जरुरत होती है जिसे केवल आपनी सोच में ही हम रख कर पूरा नहीं कर पाते है ।

मै और ना जाने हम जेसे कितने लोग जो केवल सब्दो की माला को पिरो कर यह सोच लेते है की हम जीवन को दुसरे लोगो से बेहतर समझ कर और जीवन में अच्छे विचार रख कर कुछ बदलाव कर रन्हे है पर सायद नहीं ... ये हमारी अन्दर की जरुरत है जिसे कर हम आपने आप को थोड़ी ख़ुशी दे पाते है क्या हम ये हम सही कर रन्हे है ?

सायद मुझे कुछ हसी भी आती है मैंने अयसे इन्सान पर सवाल उठाये है जिन्होंने जीवन के अलग मैयाने ही बदले थे ।

Monday, December 27, 2010

The bigger your heart is, the more it feels that the whole world belongs to you.

Sunday, December 26, 2010

यह भी एक जीवन है

करीब आज चार महीने हो गए स्टेशन की वो भीर और लोगो की जीवन चक्र को पूरा करने की भाग दौर को देखते हुए । उस भीड़ का हिस्सा मै भी हूँ और इतने समय बीत जाने के बाद उस औरत को आज भी उसी तरह देखता हु जेसा मैंने पहली बार स्टेशन पर देखा था । सायद हजारो लोगो की सोच उस औरत की प्रति बदल गई होगी पर उसकी सोच में आज तक कोई फरक नहीं आया है । सायद वही उसकी जीने की आस और आपनी सोच को हमेसा कायम रख कर जितने भी दिन हो जीने की वही जरिया से जीना चाहती है ।

टिकेट काउंटर की हरेक लाइन के लोगो के पास जा कर कुछ वैसे सब्दो को दुहराते रहना जिसे हर वक़त मै सुनता हु और उसकी हरेक समय की हरकतों को उसके चहेरे पर पढ़ना हजारो अजीब सी सवाल मेरे जेहन में आती है । " बाबु मेरी ट्रेन छुट रही है कुछ पैसे कम हो रन्हे है" कई लोगो के ना कहने और लोगो को उसके ऊपर ना बिस्वास करने के लिये कहने पर भी मेरे हांथ रुके नहीं और एक दस के नोट को मैंने उसके हाथ में थमा दिये । मेरे आगे के एक आदमी ने मुझ से पूछा "आप उस औरत को जानते है" मैंने कान्हा " नहीं" और और मुझ पर मुस्कुराने लगा । और मेरी नज़र उस बूढी औरत को देखने लगी की उसकी मुश्किले मेरे अंश भर के सहायता से कम हुई की नहीं.
पर कुछ पल के बाद मेरे चहेरे पर हलकी सी मुस्कान आई क्युकी सायद वह आपने पेट के लिये वह काम कर रही थी । और वह उसकी रोज की जीवन थी जिसे मै आज भी देखता हूँ ।

मुझे खुद पर अफ़सोस हुआ यह जान कर सायद यह भी एक जीवन का एक अंश है और उसे उसमे कोई अफ़सोस नहीं है । और हम उस औरत की जीवन के भगौलिक सुख से कंही आगे है पर सायद एक एक कदम पर हम अपने आपनो, आपने जीवन से उस सुख और सन्ति की उम्मीद करते रहते है और ना जाने कितने रिस्तो को उस रिश्तो के लिये भूलते जाते है जो उन सभी रिस्तो की सीडी होती है जिसपर हमें चड़ने के बाद लौटना भी उसी रास्ते से है ।

Saturday, December 25, 2010


आपके लिए राजेश....
मैंने आपको देखा नहीं
सिर्फ सुना हूँ
महसूस किया है बेहद करीब से
कभी-कभी अचानक भी कुछ हो जाता है
कुछ उम्मीद से होता है....
बाकी सब मन का मर्म होता है
शायद मै आपके लिए वही पर हूँ ....
राहुल

Wednesday, December 22, 2010

A s soon as you remember your true self, restoration of your inner strength occurs and you return to a place of harmony।